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शिक्षा · नई दिल्ली,

संपादकीय: सिर्फ डिग्री के पीछे न भागें युवा

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अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की हालिया प्रकाशित 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट-2026' में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 में देश का एक युवा स्नातक हर महीने लगभग 21,800 रुपये कमाता था, वहीं एक गैर-स्नातक की कमाई लगभग 9,000 रुपये थी, जबकि वर्ष 2023 तक आते-आते एक स्नातक की कमाई घटकर 19,573 रुपये रह गई, वहीं गैर-स्नातक की कमाई बढ़कर 10,507 रुपये हो गई है।

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि भारत के 20 से 29 वर्ष के 67 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं। साल 2004 में यह आंकड़ा सिर्फ 32 प्रतिशत था। 'आईएलओ-आईएचडी इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024' ने भी खुलासा किया था कि युवा स्नातकों में बेरोजगारी की दर 29 प्रतिशत है, जबकि अनपढ़ नौजवानों में यह दर सिर्फ तीन प्रतिशत पाई गई।

बहुत सारे स्नातक सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लग जाते हैं। तमिलनाडु लोक सेवा आयोग के समूह-4 की एक ही भर्ती के लिए 1.37 करोड़ आवेदन आए थे। सरकारी नौकरियों के प्रति इतनी दीवानगी इसलिए है, क्योंकि पक्की नौकरी, ज्यादा वेतन, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन के साथ सामाजिक रुतबा भी मिलता है। साल 2004 से 2023 के बीच भारत में सालाना 50 लाख स्नातक शिक्षण संस्थानों से निकले, जिनमें से हर साल केवल 28 लाख को रोजगार मिल पाया। इस समस्या से पार पाने के लिए डिग्री के बजाय नियोक्ता के अनुकूल कौशल विकास अधिक सहायक होगा। श्रम बाजार की बेहतर जानकारी और आसानी से जॉब खोजने वाले पोर्टल आने चाहिए।

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