ड्यूटी के बाद भक्ति के रंग में रंग जाते हैं खाकीधारी, हारमोनियम और ढोलक की धुन पर ठाकुर जी के भजनों में लगाते हैं ध्यान
मथुरा (वृंदावन)। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन में भक्ति और आध्यात्मिकता का ऐसा वातावरण है, जहां पहुंचकर श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। इसी आध्यात्मिक वातावरण में लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मी भी अपनी व्यस्त दिनचर्या और तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच सुकून के पल तलाश रहे हैं। बांके बिहारी मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने मानसिक तनाव और थकान दूर करने का अनूठा तरीका अपनाया है।
दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करना, सुरक्षा व्यवस्था संभालना और कड़ी धूप में लगातार ड्यूटी करना पुलिसकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में जब उन्हें कुछ समय मिलता है तो वे मनोरंजन के अन्य साधनों के बजाय बांके बिहारी मंदिर के समीप स्थित एक आश्रम पहुंचकर भजन-कीर्तन में शामिल हो जाते हैं।
आश्रम में पहुंचते ही पुलिसकर्मियों का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। सुरक्षा ड्यूटी में लाठी और अन्य उपकरण संभालने वाले दरोगा जी हारमोनियम पर भक्ति के सुर छेड़ते नजर आते हैं। वहीं ढोलक की थाप, मंजीरों की मधुर ध्वनि और खड़ताल की संगत से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। कुछ देर के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ और ड्यूटी का दबाव पीछे छूट जाता है और सभी ठाकुर जी की आराधना में लीन हो जाते हैं।
बांके बिहारी मंदिर की सुरक्षा में तैनात अशोक कौशिक, धर्मेंद्र पाराशर, जगदीप और जगविंदर सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मी इस भजन-कीर्तन में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। कठिन और जिम्मेदारी भरी ड्यूटी के बीच भक्ति-संगीत उनके लिए मानसिक सुकून और नई ऊर्जा का माध्यम बन रहा है।
इन पुलिसकर्मियों की दिनचर्या यह संदेश देती है कि कर्तव्य और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। दिनभर कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में मुस्तैद रहने वाले ये खाकीधारी जब ठाकुर जी के चरणों में बैठकर भजन गाते हैं तो उनकी आस्था का एक अलग ही स्वरूप सामने आता है। वृंदावन में पुलिसकर्मियों की भक्ति और संगीत से जुड़ी यह पहल लोगों के लिए आकर्षण के साथ प्रेरणा का विषय बनी हुई है।