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वृंदावन.. सिर्फ एक नगरी , बल्कि कण-कण में रची-बसी भक्ति का एहसास है। यहाँ दूर-दूनहींर से लोग शांति और सुकून की तलाश में आते हैं। लेकिन जरा सोचिए, जो लोग दिन-रात हमारी सुरक्षा में अपनी ड्यूटी पूरी मुस्

Anil Yadav ·
वृंदावन.. सिर्फ एक नगरी , बल्कि कण-कण में रची-बसी भक्ति का एहसास है। यहाँ दूर-दूनहींर से लोग शांति और सुकून की तलाश में आते हैं। लेकिन जरा सोचिए, जो लोग दिन-रात हमारी सुरक्षा में अपनी ड्यूटी पूरी मुस्

Location Vrindavan Mathura Uttar Pradesh

वृंदावन.. सिर्फ एक नगरी

, बल्कि कण-कण में रची-बसी भक्ति का एहसास है। यहाँ दूर-दूनहींर से लोग शांति और सुकून की तलाश में आते हैं। लेकिन जरा सोचिए, जो लोग दिन-रात हमारी सुरक्षा में अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से निभाते हैं, वे अपनी थकान और स्ट्रेस को कैसे भगाते हैं

दिनभर की भागदौड़, कड़ी धूप और सुरक्षा की जिम्मदारियाँ... जब इनसे थोड़ा वक्त मिलता है, तो ये खाकी वाले अपनी थकान मिटाने किसी क्लब या रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि सीधे बांके बिहारी के दरबार के पास बने एक आश्रम में पहुँच जाते हैं।

और फिर शुरू होता है एक ऐसा जादू, जहाँ वर्दी की पाबंदियाँ पीछे छूट जाती हैं और रूह संगीत में डूब जाती है। हाथों में थामी लाठी और बंदूक की जगह, दरोगा जी की उंगलियां हारमोनियम के सुरों पर थिरकने लगती हैं। साथ में ढोलक की थाप, मंजीरे की खनक और खड़ताल की गूंज..."

यहाँ न कोई तनाव है, न कोई थकान। वृंदावन के इन पुलिसकर्मियों ने तनाव दूर करने का एक ऐसा खूबसूरत और अनूठा तरीका ढूंढ लिया है, जहाँ प्रभु की भक्ति भी होती है और मन को सुकून का आशीर्वाद भी मिलता है।

खाकी के अंदर छिपा एक भक्त, जब भगवान के चरणों में झुकता है, तो दुनिया की हर थकान हार जाती है।

बांके बिहारी मंदिर की सुरक्षा में तैनात ये पुलिसकर्मी (अशोक कौशिक, धर्मेंद्र पाराशर, जगदीप. जगविंदर सिंह आदि) वाकई निष्काम सेवा और भक्ति की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहे हैं।

कठिन और तनावपूर्ण ड्यूटी के बावजूद, जैसे ही इन्हें समय मिलता है, ये अपने पद और वर्दी से ऊपर उठकर ठाकुर जी के प्रांगण में कीर्तन और भजन में लीन हो जाते हैं। यह न केवल उनके मानसिक तनाव और दिनभर की थकान को दूर करने का एक सुंदर तरीका है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कर्तव्य और अध्यात्म एक साथ कैसे निभाए जा सकते हैं।

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